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08, March

यूपी के कानपुर व उन्नाव के बीच बनेगी सेटेलाइट सिटी , जानें क्या होंगे फायदे

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कानपुर व उन्नाव के बीच सेटेलाइट सिटी बनाई जाएगी। इसके लिए शुक्लागंज में जमीन का चिह्नीकरण होगा। इस सिटी से कानपुर के साथ ही उन्नाव में भी रहने वालों को आसानी होगी। यहां रहने वाले दोनों शहरों में आराम से आ जा सकेंगे। अर्बन अफोर्डेबल हाउसिंग पॉलिसी के लिए शासन द्वारा गठित की गई कमेटी ने इसका प्रस्ताव किया है। केडीए उपाध्यक्ष के. विजयेंद्र पाण्डियन ने यहां मीडिया से बातचीत में बताया कि ऐसा प्रस्ताव राज्य के सभी शहरों के लिए किया गया है। इससे आवास की समस्या दूर होगी। उनका कहना है कि अब सेटेलाइट मैप से देखा जाएगा कि अपना शहर किस तरफ बढ़ रहा है। किस दिशा में लगातार निर्माण हो रहे हैं। बसावट जिधर हो रही है उधर कौन सा शहर है और उस शहर से कनेक्टिविटी कैसी है, इसका अध्ययन करने के बाद दोनों शहरों के बीच में सेटेलाइट शहर बसाया जाएगा। उदाहरण के तौर पर कानपुर और उन्नाव के बीच शुक्लागंज को इसके लिए चुना गया है। वह कहते हैं कि अभी शुक्लागंज और कानपुर एकदम सट गए हैं। आबादी यहां से वहां तक लगातार मिली हुई है। अब शुक्लागंज में जहां जमीन ज्यादा मिल जाएगी वहां सेटेलाइट सिटी बनाई जा सकती है। इसके लिए दोनों शहरों को टि्वन सिटी की तरह देखना होगा। सुविधाएं दोनों जिलों से बराबर मिलनी चाहिए। अपर मुख्य सचिव आवास एवं शहरी नियोजन के समक्ष प्रेजेंटेशन में केडीए उपाध्यक्ष ने बताया कि सेटेलाइट सिटी से दो शहरों के बीच की दूरी भी घटेगी और आराम से बसावट भी हो सकेगी। यह भी संभव है कि निजी डेवलपर्स ऐसी सिटी का निर्माण करें। मगर यह तय होगा कि ऐसी सिटी में सिर्फ सस्ते आवास होंगे। इस तरह की सिटी कानपुर और फतेहपुर के बीच भी बनाई जा सकती है। मगर अभी इस अध्ययन करना होगा। क्या है सेटेलाइट सिटी सेटेलाइट सिटी का मतलब है दो शहरों के बीच बसाया जाने वाला ऐसा शहर जहां से दोनों शहरों की लगभग समान दूरी हो। ऐसी सिटी जिसके बसने के बाद दोनों बड़े शहर एक दूसरे से कनेक्ट हो जाएं। दोनों की आबादी सेटेलाइट सिटी तक पहुंच जाए। इसे जुड़वां शहर (ट्विन सिटी) को बिल्कुल पास लाने का बड़ा माध्यम भी कह सकते हैं। इस सिटी की कल्पना सेटेलाइट मैप के जरिए की जाती है। सेटेलाइट मैप से देखा जाता है कि दोनों शहरों के बीच किस तरफ बसावट हो रही है। उसी तरफ बीच में सेटेलाइट सिटी के नाम से टाउनशिप की लांचिंग होती है। यहां लोग आसानी से प्लॉट या आवास ले लेते हैं क्योंकि दोनों शहरों के बीच पहले से ही दूरी कम हो रही होती है। यह भविष्य में आवास की समस्या को दूर करने की प्लानिंग है।

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