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08, March

बीएड-2018 : 7 दिन बचे, सिर्फ 29 हजार ने किए आवेदन, पिछले वर्ष 4.16 लाख ने किया था आवेदन

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बीएड 2018-20 पाठ्यक्रम को लेकर अभी से आशंकाओं का दौर शुरू हो गया है। हालत इतनी खराब है कि संयुक्त प्रवेश परीक्षा बीएड -2018 के लिए आवेदन की अन्तिम तिथि 15 मार्च निर्धारित की गई है। आवेदन के लिए अब अन्तिम सात दिन बचे हैं। लेकिन, अभी तक सिर्फ 29 हजार के आसपास आवेदन आए हैं। जानकार इस खराब स्थिति को युवाओं में बीएड पाठ्यक्रम को लेकर गिरती रुचि से जोड़कर देख रहे हैं। पहले ही राजधानी समेत प्रदेश भर में संचालित स्कूलों को अच्छे शिक्षक नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में बीएड पाठ्यक्रम को लेकर युवाओं के गिरते रुझान ने भी आने वाले समय में प्रदेश में अच्छे शिक्षकों की उपलब्धता को लेकर शिक्षाविदों की चिंताएं बड़ा दी हैं। प्रदेश के बीएड कॉलेजों में दाखिले के लिए संयुक्त प्रवेश परीक्षा बीएड-2018 का आयोजन लखनऊ विश्वविद्यालय कर रहा है। इसके लिए आवेदन की प्रक्रिया 15 फरवरी के आसपास शुरू की गई थी। अन्तिम तिथि 15 मार्च निर्धारित की गई है। बुधवार देर शाम तक करीब 29 हजार अभ्यर्थियों द्वारा आवेदन की प्रक्रिया पूरी करने की जानकारी सामने आई। वहीं, करीब 50 हजार पंजीकरण कराए गए हैं। पिछले वर्ष 4.16 लाख आवेदन पिछले वर्ष भी लखनऊ विश्वविद्यालय ने ही इस प्रवेश परीक्षा को कराया था। तब 1.96 लाख सीट के लिए करीब 4.16 लाख आवेदन आए थे। हालांकि, इस स्थिति के बाद भी कई निजी कॉलेजों के लिए सीट भरना मुश्किल हो गया था। लेकिन, मौजूदा स्थिति ने चिंताएं और भी बढ़ा दी हैं। बीएड कॉलेजों में दाखिले के लिए आगामी 11 अप्रैल को प्रवेश परीक्षा होगी। इसके लिए आवेदन की अन्तिम तिथि 15 मार्च निर्धारित की गई है। लखनऊ विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से बुधवार को इस संबंध में सूचना जारी की गई है। कोट--- स्थितियां कुछ चिंताजनक हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस बार कई सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं। ऐसे में आवेदन के समय काम करने वाले दलालों और निजी कॉलेजों का गठजोड़ टूटा है। उम्मीद जताई जा रही है कि अब इस क्षेत्र में अच्छे अभ्यर्थी मिलेंगे। 11 अप्रैल प्रवेश परीक्षा निर्धारित है। ऐसे में आवेदन तिथि में विस्तार की उम्मीद कम है। - प्रो. नवीन खरे, समन्वयक, बीएड-2018 दो साल के बीएड ने गिराया रुझान इस गिरते रुझान के लिए जानकार पाठ्यक्रम की समय सीमा बढ़ाकर दो साल किए जाने को भी जिम्मेदार मान रहे हैं। जानकारों का कहना है कि इस पाठ्यक्रम में छात्र-छात्राओं को सिर्फ पढ़ाने का तरीका सिखाया जाता है। इसके लिए एक साल का समय पर्याप्त है। पहले ही अच्छे शिक्षकों की कमी से जुझ रहे हैं स्कूल सिर्फ राजधानी ही नहीं प्रदेश भर में वर्तमान में अच्छे शिक्षकों की भारी कमी है। प्राइवेट स्कूलों को शिक्षक मिल ही नहीं रहे हैं। एक सीट के लिए आवेदन भले ही 50 आ रहे हो लेकिन योग्य शिक्षक नहीं है। हाल में ही शहर के निजी स्कूलों ने बड़ी संख्या में शिक्षकों की डिमांड सामने आई थी। पिछले दिनों नामचीन स्कूलों ने आवेदन भी मांगे थे। करीब एक हजार से ज्यादा शिक्षक और दो हजार से ज्यादा शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के लिए आवेदन लिए गए थे। लेकिन, योग्य शिक्षकों की भारी कमी सामने आई। कोट --- स्कूल में 20 से ज्यादा शिक्षकों के पदों के लिए आवेदन मांगे गए । कई आवेदन भी आए। लेकिन, योग्य शिक्षक ही नहीं मिले। यह स्थिति पिछले कई वर्षों से नजर आ रही है। - लोकेश सिंह, प्रबंधक, लखनऊ पब्लिक स्कूल

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