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22, March

107 साल पहले बंगाल से अलग हुआ था ये राज्य, जानें क्यों नाम पड़ा बिहार

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पटना। जिसने पूरी दुनिया को सबसे पहले लोकतंत्र की सीख दी। जिसके आंगन में बौद्ध, जैन जैसे धर्म का जन्म हुआ। जहां पढ़ने का सपना सात समुद्र पार के छात्र भी देखा करते थे। उस धऱती का आज बर्थ डे है। जी हां, आज बिहार हैप्पी बर्थ डे मना रहा है। बता दें कि अंग्रेजों ने शासन को मजबूत करने के लिए बंगाल से बिहार को 22 मार्च 1912 को अलग कर दिया था। बंटवारा होने के बाद बिहार को एक राज्य के तौर पर देश की मैप में जगह मिली। हालांकि, बिहार का इतिहास 1912 से शुरू नहीं है। ये इतिहास के पन्नों में काफी पुराना है। जो कभी मगध साम्राज्य के नाम से जाना जाता था। ऐसे नाम पड़ा बिहार बौद्ध धर्म का जन्म और विस्तार बिहार से हुआ था। गौतम बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति गया के बोधि वृक्ष के नीचे हुई थी। बौद्ध भिक्षुओं के लिए यहां कई मठ बने हुए थे। जिसे विहार कहा जाता था। इसका तात्पर्य था घूमने के लिए आनेवाले बौद्ध भिक्षुओं का निवास स्थान। इसी को देखते हुए बंगाल से विभाजन के बाद इसका नाम बिहार रखा गया। पटना नहीं पाटलिपुत्र बिहार की राजधानी का पुराना नाम पाटलिपुत्र था। उस दौर में मगध साम्राज्य की ये राजधानी हुआ करती थी। मौर्य शासन का पताका यहीं से लहराता था। इसकी सीमा उस दौर में अफगानिस्तान तक जाती थी। नालंदा विश्वविद्धालय में पढ़ने के लिए दुनिया भर से स्टूडेंट आया करते थे। पूरी दुनिया में ज्ञान का केंद्र हुआ करता था नालंदा। हो चुके हैं कई विभाजन 1912 में बंगाल से अलग होने के बाद भी बिहार से दो राज्य निकलकर बाहर आए। साल 1935 में बिहार से उड़िसा अलग होकर राज्य बना। जिसे अब ओडिशा के नाम से जानते हैं। इसके बाद साल 2002 में बिहार से अलग होकर झारखंड राज्य अस्तित्व में आया। बिहार की देन जिस शून्य के बदौलत आज लोग मंगल तक मनुष्य को पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। उसकी खोज बिहार के वैज्ञानिक ने ही किया था। मशहूर साइंटिस्ट आर्यभट्ट का जन्म बिहार में हुआ था। अर्थशास्त्र को लेकर आज भी चाणक्य का उदाहरण दिया जाता है। मगध सम्राज्य इन्हीं के इशारों पर चलता था। तिरंगे झंडे में जो चक्र दिखाई देता है वो मगध सम्राट अशोक के पिलर (स्तंभ) से लिया गया है।

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