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05, March

राजस्थान में बारिश, आंधी और ओलावृष्टि ने मचाई भारी तबाही

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राजस्थान में कर्ज माफी करने की मांग के बीच किसानों पर प्रकृति की दोहरी मार पड़ी है। रविवार को अचानक मौसम में आए बदलाव के बाद तेज अंधड़, बरसात और जबरदस्त ओलावृष्टि के कारण राज्य के सीकर, झुंझुनूं, हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर और चूरू में अधिकांश फसलें बर्बाद हो गईं। हालांकि, राज्य सरकार ने पहले ही दिन पटावारियों-गिरदावरों को जल्द से जल्द रिपोर्ट देने को कहा है। हाल ही में जयपुर में विधानसभा कूच करने वाले किसान नेता व पूर्व विधायक अमराराम ने सरकार से तुरंत इस आपदा में किसानों को राहत देने के लिए राज्य सरकार से मुआवजे की मांग की है। उनका कहना है कि राजस्थान में आधा दर्जन जिलों में भारी ओलावृष्टि हुई है। जहां पर किसानों के गेहूं, जौ, चना और सरसों की फसलों को जमींदोज कर दिया है। उनका कहना है कि पहले से कर्जे की मार झेल रहे किसानों के लिए मौसम खौफनाक सपना बन गया है, जिससे उबरने के लिए सरकार को आगे आना चाहिए। दूसरी तरफ किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने कहा है कि शेखावाटी के अधिकांश जिलों में किसानों पर कुदरत की भारी मार पड़ी है। ऐसे में राज्य सरकार को चाहिए कि फसलों के मुआवजे के साथ-साथ सम्पूर्ण कर्जा माफ कर अन्नदाता को बचाना चाहिए। जाट का कहना है कि यह ऐसी आपदा है जिसके कारण एक दिन में ही लाखों की संख्या में किसान सड़क पर आ गए हैं। उनके अनुसार राज्य का किसान यह बर्बादी बर्दास्त नहीं कर पाएगा, इसलिए सरकार को चाहिए कि जल्द से जल्द मुआवजा देकर किसान को हुई भयानक आर्थिक हानि से बचाया जाए। सीकर में नींबू से भी बड़े आकार के ओलों ने खेतों में पकने के लिए लहलहाती फसलों को जमीन सुंघा दी। ओलावृष्टि से एक ओर सरसों की फली टूटकर जमीन पर गिर चुकी है। वहीं चने के पौधे टूटने के कारण उनकी बलियां मिट्टी में दब गई। गेहूं व जौ की फसलें बुरी तरह से खराब हो चुकी है। बरसात के साथ आंधी और फिर गिरे ओलों ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। गौरतलबहै कि तकरीबन सभी फसलें अगले एक माह में कटने वाली थीं। दरअसल, किसान बीते सितंबर माह से ही सम्पूर्ण कर्जमाफी की मांग को लेकर राज्य में आंदोलन कर रहे थे। इस सिलसिले में बीती 22 तारीख को जयपुर में विधानसभा कूच व महापड़ाव का कार्यक्रम था, लेकिन जिले से बाहर ही 197 किसान नेताओं को पुलिस ने पकड़ लिया और जेल भेज दिया था, जिसके कारण आंदोलन वापस लेना पड़ा था। किसान सभा ने कहा है कि अब झुंझुनूं में 8 मार्च को पीएम मोदी की सभा में काले झंडे दिखाए जाएंगे।

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